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छतरपुर- धरोहर संकट में, उपेक्षा और लापरवाही से बदहाल हो रहा धुबेला संग्रहालय, पर्यटकों को नहीं मिल रहीं बुनियादी सुविधाएं,

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(लखन राजपूत)

छतरपुर (मऊसहानियां)। पुरातत्व विभाग की उपेक्षा व जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही की वजह से बुंदेलखंड क्षेत्र का प्राचीन संग्रहालय धुबेला इस समय बदहाल स्थिति में है और अगर समय रहते इस ओर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले समय में धुबेला की स्थिति और अधिक बदतर होने से रोक पाना संभव प्रतीत नहीं हो रहा है।
उल्लेखनीय है कि झांसी-खजुराहो मार्ग पर छतरपुर से लगभग 20 किलोमीटर दूर मऊसहानियां में धुबेला संग्रहालय को प्रदेश के सबसे बड़े संग्रहालय का दर्जा प्राप्त है और इसे देखने के लिए हर साल हजारों की संख्या में देशी और विदेशी सैलानी आते हैं। वर्ष 1955 में तत्कालीन प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरु द्वारा इस धुबेला म्यूजियम का उद्घाटन किया गया था। मौजूदा समय में चूंकि मऊसहानियां में महाराजा छत्रसाल की 52 फिट की प्रतिमा भी सैलानियों के लिए आकर्षण का केन्द्र बनी हुई है ऐसी स्थिति में धुबेला का महत्व और अधिक बढ़ जाता है लेकिन धुबेला के जिम्मेदार अधिकारी न तो म्यूजियम के रखरखाव पर ध्यान दे रहे हैं और न ही सैलानियों को मिलने वाली सुविधाओं पर। ऐसी स्थिति में आने वाले समय में धुबेला म्यूजियम उपेक्षा का शिकार होता नजर आ रहा है। इस दौरान जो भी सैलानी धुबेला म्यूजियम देखने के लिए जाते हैं उन्हें बेहद परेशानियों का सामना करना पड़ता है। न तो उनके वाहनों को सुरक्षित रखने की व्यवस्था है और संग्रहालय के अंदर भी सुरक्षा के लिए जो प्रबंध किए गए हैं उनमें भी बेहद लापरवाही बरती जा रही है। धुबेला संग्रहायल में लगे सीसीटीवी कैमरे वर्षों से बंद पड़े हुए हैं। ऐसी स्थिति में सैलानियों के साथ अगर कोई घटना होती है तो इसके लिए भी जिम्मेदार अधिकारी जवाब देने की स्थिति में नहीं रहेंगे। सुरक्षा की पुख्ता व्यवस्था न होने की वजह से कई बार चोरी की वारदातें भी हो चुकी हैं जिनका खुलासा आज तक नहीं हो पाया है।

नए वर्ष के लिए नहीं कोई तैयारी

उल्लेनीय है इस संग्रहालय को देखने के लिए सबसे ज्यादा लोग नए वर्ष के अवसर पर आते हैं लेकिन कल से शुरु होने जा रहे नए वर्ष हेतु कोई तैयारी नहीं की गई है। नए वर्ष पर आने वाले सैलानियों के वाहनों के लिए कोई व्यवस्था नहीं है, यदि इस दौरान उनका वाहन चोरी हो जाए तो इसका जिम्मेदारी लेने वाला कोई नहीं है। इसके साथ ही संग्रहालय के अंदर के हालात भी दयनीय हैं। जगह-जगह दीमक लगी हुई है, कांच और फर्नीचीर टूटे पड़े हैं, जगह-जगह कचरे के ढेर लगे हुए हैं। प्रबंधन की इस लापरवाही के कारण सैलानियों को यहां आने में कोई रुचि नहीं रह जाएगी और यहां आने वाले सैलानियों की संख्या में कमी भी आ सकती है।

दो बार से नहीं हो पा रही वाहन पार्किंग की नीलामी

संग्रहालय के बाहर स्थित पार्किंग की नीलामी की जाती थी किंतु दो बार से यह नीलामी नहीं हो पा रही है। पिछले वर्ष नीलामी के दौरान 86100 रुपए का ठेका होना था जो किसी ने नहीं लिया। इसके बाद इस वर्ष नए तरीके से नीलामी होनी थी लेकिन अधिकारियों ने कहा कि इस वर्ष भी नीलामी 86100 रुपए से ही होगी जिस कारण से इस बार भी पार्किंग का ठेका किसी को नहीं मिल सका और यही कारण है कि यहां आने वाले लोगों के वाहन असुरक्षित रहते हैं और हमेशा चोरी का डर बना रहता है।

असमाजिक तत्वों ने घटा दी मस्तानी महल की शोभा

संग्रहायल के बगल में मौजूद मस्तानी महल की शोभा कुछ असमाजिक तत्वों द्वारा यहां की दीवारों पर अभद्र टिप्पणियां लिखकर घटा दी गई है। ज्ञात हो कि यह महल संग्रहालय की बाउंड्री वाल के अंदर मौजूद है इसके बाद भी असमाजिक तत्वों द्वारा दीवारों पर लिख दिया जाता है इससे पता चलता है कि संग्रहालय के अंदर की सुरक्षा व्यवस्था कितनी मजबूत है। बहरहाल जो भी हो लेकिन यदि संग्रहालय की सुरक्षा व्यवस्था, मरम्मत और प्रबंधन दुरुस्त नहीं किया गया तो वह दिन दूर नहीं जब इस संग्रहालय को देखने कोई नहीं आएगा।

इनका कहना

आपके माध्यम से जिन समस्याओं को रेखांकित किया गया है उनके बारे में कल ही जानकारी कराता हूं और व्यवस्थाएं दुरुस्त कराता हूं।
अनुपम राजन, कमिश्नर पुरातत्व विभाग