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तंत्र में वर्तमान जरूरतों के मुताबिक बदलाव जरूरी – कमलनाथ

सुशासन का अर्थ है सबसे कमजोर और गरीब को त्वरित न्याय मिले - कमलनाथ

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मुख्यमंत्री कमलनाथ का कमिश्नर-कलेक्टर्स कांफ्रेंस में संबोधन
पोलिटिकल ब्यूरो – भोपाल
मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि आज वर्तमान जरूरतों के मुताबिक तंत्र में बदलाव जरूरी है। अंग्रेजों के जमाने की इस व्यवस्था में परिवर्तन करने पर उनकी सरकार काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि आम लोगों की सहायता, सहयोग और समर्थन की व्यवस्था लागू होना चाहिए। यह हमारा लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि कमिश्नर और कलेक्टर संभाग और जिला स्तर पर सरकार का चेहरा हैं। जनता और सरकार के बीच नोडल पाइंट हैं। इसलिये आपकी भूमिका महत्वपूर्ण है। सबसे कमजोर और गरीब वर्ग को तत्काल और त्वरित न्याय मिलेगा तभी प्रदेश में सुशासन की स्थापना कर पाएंगे। मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ आज मंत्रालय में कमिश्नर-कलेक्टर कांफ्रेंस को संबोधित कर रहे थे। मुख्य सचिव श्री एस.आर. मोहंती बैठक में उपस्थित थे।
मौजूदा व्यवस्था में परिवर्तन जरूरी
मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि आज लोगों की जरूरतें अपेक्षाएँ और आकांक्षाओं में परिवर्तन हुआ है। उन्होंने कहा कि जो मौजूदा व्यवस्था काम कर रही है वह 60-70 साल पुरानी है। इस व्यवस्था को हमें आज के संदर्भ में बदलना होगा ताकि वह लोगों की अपेक्षाओं पर खरा उतरे। मुख्यमंत्री ने कहा कि  नई सरकार का सोच स्पष्ट है। कानून और नियम के कारण आम-आदमी को दिक्कत नहीं होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिसके पास कुछ भी नहीं है वह सरकार की योजनाओं का लाभ पाएँ यह सुनिश्चित करने का काम जिला कलेक्टरों का है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कलेक्टर-कमिश्नर तंत्र के नोडल पाइंट हैं। उनका आपस में और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर तालमेल हो यह उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है।
मुख्यमंत्री कमलनाथ का कमिश्नर-कलेक्टर्स कांफ्रेंस में संबोधन
जहाँ सुशासन नहीं वहाँ समस्याएँ अधिक
कमलनाथ ने कहा कि मेरा अनुभव यह कि जिस जिले में सुशासन नहीं है वहाँ समस्याओं के सबसे अधिक आवेदन मिलते हैं और यही उस जिले का रिपोर्ट कार्ड बतलाता है। उन्होंने कहा कि आज जरूरत इस बात की है कि जनता से जुड़ी संस्थाओं को ऐसा स्वरूप दें कि वे तत्काल तत्परता के साथ लोगों की समस्याओं का समाधान कर सकें। उन्होंने कहा कि जो काम जिला और संभाग स्तर पर हो सकते हैं उसके लिये आम-आदमी को अगर मुख्यमंत्री, मंत्री और मंत्रालय के पास तक आना पड़े यह उचित नहीं है। अधिकारियों को अपनी जिम्मेदारी समझना होगी और जवाबदेही तय करना होगी।
न्याय से कोई वंचित न हो
मुख्यमंत्री ने कहा कि संविधान में हमारे नागरिकों को स्वतंत्रता समानता और न्याय का जो बुनियादी अधिकार दिया है। उससे वह वंचित न हो यह मेरी सरकार का लक्ष्य है। मुख्यमंत्री ने कहा कि समानता और स्वतंत्रता असीमित नहीं है। लेकिन न्याय असीमित है और उसे अधिकार है कि वह स्वतंत्रता और समानता के अधिकार में हस्तक्षेप कर सके। यही हमारे लोकतंत्र की नीव है। सरकार की इस मंशा को अधिकारियों को आत्मसात करना होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनसुनवाई, सीएम हेल्पलाइन, लोकसेवा गारंटी जैसे दिखावे के लिये न हो। उन्हें और अधिक प्रभावी बनाने की जरूरत है। इनके जरिये हम लोगों की समस्याओं का शीघ्रता से समाधान कर सकते हैं।
तंत्र में वर्तमान जरूरतों के मुताबिक बदलाव जरूरी – कमलनाथ
आयुक्त अपनी भूमिका तय करें
मुख्यमंत्री ने कहा कि आयुक्त अपनी भूमिका को नये सिरे से तय करें। वे अपने अधीनस्थ जिलों में निरंतर मॉनिटरिंग करें और प्रो-एक्टिव होकर काम करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमको मैदानी समस्याओं की जानकारी अखबारों-आंदोलनों और शिकायतों से नहीं मिलना चाहिए। कलेक्टर और कमिश्नर की ओर से हमें सूचना आएं, तभी हम सुचारु तंत्र संचालन का दावा कर सकते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्थानीय स्तर पर कौनसी समस्या विकास में बाधक है जो लोगों की समस्याओं का कारण बनेगी। इसकी जानकारी से कमिश्नर-कलेक्टर मुझे अवगत करवाएँ। वे मुझसे सीधे संवाद कर सकते हैं और अपने सुझाव दे सकते हैं।
नीति से नहीं वातावरण और विश्वास से निवेश आता
मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि हमे इस बात पर विचार करना चाहिए कि मध्यप्रदेश में निवेश क्यों नहीं आता। उन्होंने कहा कि औद्योगिक जगत से निरंतर उन्हें यह फीडबैक मिला है यहाँ निवेश में प्रारंभ से ही दिक्कतें शुरु हो जाती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हम मध्यप्रदेश में नीति नहीं ऐसा वातावरण और विश्वास पैदा करना चाहते हैं जिससे निवेश अपने आप प्रदेश की तरफ आकर्षित हों। उन्होंने कहा कि निवेश की हमें आज सबसे ज्यादा जरूरत इसलिये हैं क्योंकि हम इसके जरिए बड़े पैमाने पर रोजगार उपलब्ध करवाने के साथ ही प्रदेश में आर्थिक गतिविधियों का विस्तार कर पायेंगे। उन्होंने इस पर विशेष ध्यान देने की जरूरत बतायी।
कौशल विकास के बाद रोजगार भी मिले
मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ ने कहा कि कौशल विकास के बारे में भी हमें सोचना होगा। उन्होंने कहा कि अगर हमने नौजवानों को प्रशिक्षित कर दिया और उन्हें रोजगार नहीं मिला तो ऐसे कौशल विकास का कोई अर्थ नहीं है। हमें ऐसी नीति अपनाना होगी जिससे हम अपने नौजवानों को रोजगार दिला सकें तभी हमारे कौशल विकास के प्रयास का कोई लाभ है।
ऋण माफी योजना का लाभ तय समय-सीमा में मिले
मुख्यमंत्री ने जय किसान फसल ऋणमाफी योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि यह सरकार की  सर्वोच्च प्राथमिकता में शामिल है। इस योजना का लाभ तय समय-सीमा में लोगों को मिले यह सुनिश्चित करना आप लोगों की जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री ने कम समय में इतनी बड़ी ऋणमाफी योजना को अमल करने पर अधिकारियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि नागरिकों को मिलने वाली बुनियादी सुविधा जिनमें स्वास्थ्य, बिजली, स्कूल, पेयजल सहित अन्य सुविधाएँ शामिल हैं इनकी डिलेवरी में कोताही नहीं होना चाहिए। उन्होंने बिजली  आपूर्ति सुचारु रूप से हो यह सुनिश्चित करने को कहा है।
मुख्यमंत्री ने कानून व्यवस्था के मामले में भी आयुक्त और कलेक्टरों को सक्रिय भूमिका निभाने को कहा है। उन्होंने कहा कि पुलिस के साथ-साथ आपको प्रदेश में शांति व्यवस्था बनाये रखने में पूरी जिम्मेदारी निभाना है।
कांफ्रेंस में जय किसान ऋण माफी योजना, स्व-रोजगार योजना पेयजल व्यवस्था, प्रोजेक्ट गौशाला, राजस्व प्रकरण में लाभ बचत पत्र के गलत विद्युत देयकों के निराकरण, आपराधिक प्रकरणों का प्रत्याहरण, कानून व्यवस्था, आगामी लोकसभा चुनाव, युवा स्वाभिमान योजना, स्वास्थ्य सेवाएँ, मातृ-शिशु मृत्यु दर थथा बोर्ड परीक्षा व्यवस्थायों की समीक्षा की गई।
मुख्यमंत्री ने इस मौके पर कृषि प्रयोजन भूमि को अन्य प्रयोजन में लाने के लिये शुरु की गई ऑनलाइन प्रक्रिया का शुभारंभ किया। श्री नाथ ने ऑनलाइन प्रक्रिया के जरिए हुए डायवर्जन की प्रथम प्रति दो हितग्राहियों को  सौंपी।