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अमेठी में राहुल गांधी का चुनाव प्रचार में छत्तीसगढ़ के दिग्गज भी शामिलः आज शाम थम जाऐगा चुनावी शोर

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अमेठी ( उत्तर प्रदेश) रमेश शर्मा.  कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का अमेठी चुनाव क्षेत्र में 6 मई को मतदान से पहले यंहा आज शाम को चुनाव प्रचार का शोर थम जाऐगा। वर्ष 2014 में मोदी लहर के दौरान यंहा राहुल गांधी की जीत का अंतर थोड़ा कम हो जाने के बाद इस बार अमेठी में चुनाव प्रचार के लिए देश के कोने कोने से उनके समर्थकों ने यंहा डेरा डाल दिया है।

राहुल गांधी का अमेठी चुनाव क्षेत्र में प्रचार प्रसार के लिए पहुंचे छत्तीसगढ़ के दिग्गज आदिवासी विधायक अमरजीत भगत और यूडी मिंज का कहना है कि इस बार भी यंहा कांग्रेस की जीत सुनिश्चित है। राहुल गांधी से पहले उनके परिवार के दूसरे सदस्य भी अमेठी से प्रतिनिधित्व करते रहे हैं। इस वजह अमेठी के ज्यादातर लोगों का गांधी परिवार से घरेलू संबध बना हुआ है। भाजपा की उम्मीदवार स्मृति ईरानी यंहा से पराजित होने के बाद भी लगातार सम्पर्क रखने के बाद भी अमेठी में राहुल गांधी की लोकप्रियता में रंच मात्र भी कमी नहीं आई है। अमेठी के किसान छोटे दुकानदार, कर्मचारी, युवा वर्ग के लोग और महिलाओं में गांधी परिवार के प्रति आज भी खासा आकर्षण है।

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जशपुर जिले में कुनकुरी के युवा विधायक यूडी मिंज ने बताया कि अमेठी में पहुंच कर जब वे चुनाव प्रचार के लिए निकलते हैं तो उनके साथ स्थानीय लोगों की देखते ही देखते भीड़ इक्कठा हो जाती है। अमेठी के युवक यंहा गांधी परिवार व्दारा कराऐ गए विकास कार्यो को आगे बढ़ कर दिखाते हैं।
विधायक यूडी मिंज ने बताया कि बीते सप्ताह उन्होने कांग्रेस महासचिव श्रीमती प्रियंका गांधी के साथ ग्रामीण और शहरी अंचल में पहुंच कर चुनाव प्रचार का दौर देखा तो वे हैरान रह गए। यंहा पर जगह जगह मतदाता उनका पारंपरिक स्वागत कर रहे थे। गांधी परिवार के प्रति इस तरह लोगों का अपनापन देखने के बाद राहुल गांधी की भारी बहुमत से जीत की बात पर विरोधी पार्टी के लोग भी इनकार नहीं कर पा रहे हैं।
छत्तीसगढ़ सीतापुर के कांग्रेस विधायक अमरजीत भगत का कहना था कि अमेठी क्षेत्र के लोगों को गांधी परिवार का हर समय प्यार दुलार मिलते रहता है। इसके साथ ही यंहा के लोगों की समस्या का निवारण के लिए दिल्ली में भी अलग व्यवस्था कराई गई है। इससे किसी को भी मुश्किलों का सामना नहीं करना पड़ता है।
दरअसल, अमेठी को कांग्रेस का गढ़ कहा जाता है कांग्रेस पार्टी यहां से सिर्फ़ दो बार चुनाव हारी है एक बार 1977 में जब यहां से लोकदल उम्मीदवार रवींद्र प्रताप सिंह ने अपना पहला चुनाव लड़ रहे संजय गांधी को हराया और दूसरी बार 1998 में जब बीजेपी उम्मीदवार संजय सिंह ने कांग्रेस के कैप्टन सतीश शर्मा को हराया

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इन दो मौकों को छोड़कर उप चुनाव और आम चुनाव मिलाकर कांग्रेस पार्टी ने इस सीट पर 13 बार जीत दर्ज की है और गांधी परिवार का कोई भी सदस्य हमेशा बड़े अंतर से चुनाव जीतता रहा है. स्मृति ईरानी मोदी लहर में भी एक लाख से ज़्यादा वोटों से हारी थी लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि पिछले कुछ चुनावों तक महज़ कुछ हज़ार वोट पाने वाली बीजेपी तीन लाख से ज़्यादा वोट पाने में कामयाब हुई और ढाई.तीन लाख के अंतर से जीतने वाले राहुल गांधी महज़ एक लाख वोट से ही स्मृति इरानी को मात दे पाए

यहां यह तथ्य भी ग़ौर करने लायक़ है कि 2014 की कथित मोदी लहर में भी राहुल गांधी भले ही एक लाख से भी ज़्यादा वोटों से जीत गए हों लेकिन तीन साल बाद हुए विधानसभा चुनाव में अमेठी की पांच में से एक सीट पर भी कांग्रेस को जीत हासिल नहीं हुई यहीं चार सीट पर बीजेपी और एक सीट पर सपा की जीत हुई थी

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अमेठी के पप्पू यादव के मुताबिक पांच साल में एनडीए सरकार ने कोई ऐसी उपलब्धि वहां नहीं हासिल की जिसकी तुलना में लोग गांधी परिवार के तमाम कार्यों को भूल जाएं ऐसे में गांधी परिवार के किसी सदस्य की मौजूदगी में कोई और चुनाव जीत जाए इसकी उम्मीद कम ही है.

अमेठी के पुराने लोगों का कहना है कि राजीव गांधी और उसके बाद सोनिया गांधी की पहुंच घर घर थी . राजीव गांधी तो तमाम लोगों को नाम से जानते थे और अक्सर गांवों के दौरे पर निकल जाते थे . यही नहीं दिल्ली में अमेठी वासियों की समस्याओं की सुनवाई और उनके समाधान की विशेष व्यवस्था होती है. छत्तीसगढ़ के सीतापुर और कुनकुरी से अमेठी पहुंचे विधायक व्दय अमरजीत भगत व यूडी मिंज का कहना था कि इस हाई प्रोफाइल चुनाव क्षेत्र में उन्हें कई रोचक अनुभव सिखने को मिले हैं. इसका वे अपने क्षेत्र में लाभ लेंगे.

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