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विपक्षी एकता- हकीकत या फसाना: ममता के मंच पर एकजुटता तो दिखी, मगर लोकसभा में कांग्रेस ‘किस-किस’ से लड़ेगी?

Opposition unity - Reality or False: Mamata's Rally

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Desk : देश का सबसे बड़ा सियासी अखाड़ा यानी लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Elections 2019) सिर पर है. ‘महा मुकाबला’ की रणभेरी बजने से ठीक पहले पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में ममता बनर्जी (Mamata Banarjee) ने सभी विपक्षी पार्टियों को एक मंच पर साथ लाकर न सिर्फ अपना शक्ति का प्रदर्शन किया है, बल्कि विपक्षी एकता की झलक भी दिखा दी है. मगर ममता बनर्जी की इस रैली से कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और यूपीए की चेयरपर्सन सोनिया गांधी का अलग रहना, अपने आप में कई सवाल खड़े कर रहे हैं. मोदी सरकार के खिलाफ विपक्ष का राष्ट्रीय स्तर पर महागठबंधन की कवायद हकीकत का जामा पहनेगा या फिर यह फसाना बनकर रह जाएगा यह तो खैर वक्त बताएगा, मगर कई राज्यों में जिस तरह से कांग्रेस से क्षेत्रीय पार्टियां दूरी बनाती दिख रही हैं, उससे यह अब एक बार फिर से चर्चा होने लगी है कि क्या सच में विपक्ष एकजुट है? ऐसे सवाल मन में इसलिए भी कौंध रहे हैं क्योंकि ममता के मंच पर करीब 20 राजनैतिक दलों के नेता मौजूद दिखे, जिनमें से कुछ का कांग्रेस के साथ गठबंधन है और कुछ ऐसे हैं जो लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के बगैर लड़ने का ऐलान कर चुके हैं. कोलकाता में विपक्षी नेताओं के जमावड़े से यह स्पष्ट होता है कि भले ही उनके बीच गठबंधन न हो, मगर वह लोगों को यह दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि वह मोदी सरकार के खिलाफ एक हैं.

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दरअसल, शनिवार को ममता बनर्जी द्वारा आहुत ‘संयुक्त भारत रैली’ में करीब 20 से 22 दलों के 20 नेता एक मंच पर साथ आए. ये नेता एक मंच पर एक साथ तो जरूर आ गए, मगर इनमें से कई ऐसे हैं जो पहले ही लोकसभा चुनाव में कांग्रेस से अलग जाने का फैसला ले चुके हैं. अगर एक मंच पर विपक्षी दलों के नेता एक साथ नजर आ भी जाते हैं तो अब सवाल उठता है कि क्या बीजेपी को हराने के लिए एक साथ चुनावी मैदान में भी उतरेंगे? इसका जवाब शायद ज्यादातर ना ही होगा. कयोंकि हाल ही में उत्तर प्रदेश में मायावती और अखिलेश यादव ने सपा-बसपा के गठबंधन का ऐलान कर इस बात की तस्दीक कर दी कि यूपी में कांग्रेस अकेली हो गई है. यानी यूपी में अब कांग्रेस को बीजेपी से तो लड़ना है ही, साथ ही उसे बसपा और सपा से भी लड़ना है. इस तरह से विपक्षी पार्टियों के पास विजन स्पष्ट है कि केंद्र की सत्ता से मोदी सरकार को हराना है, मगर कैसे हटाना है यह तरीका नहीं पता है.