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परिवहन और यातायात विभाग की लापरवाही सड़क हादसों पर पड़ रही भारी

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पत्थलगांव छत्तीसगढ़

रमेश शर्मा

नशे व रफ्तार के कारण सड़क पर रोज हो रहे हादसों की रोकथाम की खातिर रायगढ़ और जशपुर जिले में यातायात और परिवहन विभाग का अमला महज औपचारिकता पूरी कर रह जा रहा है. सरकार के जिम्मेदार इन अधिकारियों की इस लापरवाही के फलस्वरूप औसतन हर दिन जिले में बड़े सड़क हादसे हो रहे हैं.
जशपुर पुलिस अधीक्षक शंकर लाल बघेल का कहना है कि रोड सेफ्टी पर ध्यान देने के साथ नशे में ड्राइविंग से दूर रहना बेहद आवश्यक है
उन्होंने कहा कि रोड सेफ्टी पर ध्यान नहीं देने, नशे में ड्राइविंग व ओवरलोडिंग के कारण ही जिले में हर दिन हादसे हो रहे हैं
इसको लेकर सड़क सुरक्षा अभियान से लेकर दूसरे तमाम तरह के कार्यक्रम किए जा रहे हैं लेकिन इसके नतीजे उम्मीद की मुताबिक नजर नहीं आ रहा है।
बुधवार की रात बगीचा बस्ती में बेकाबू स्कार्पियो और बाईक की टक्कर में अविनाश लकड़ा नामक २० वर्षीय युवक
की मौत हो गई । इस बाईक में सवार दो अन्य युवकों की भी हालत चिंताजनक देख कर उन्हें उपचार के लिए अम्बिकापुर रेफर कर दिया गया है.
इन सड़क हादसों की जब पड़ताल की तो ये बातें सामने आई। बढ़ते सड़क हादसे के कारण अब तो सड़क पर चलने में लोगों को डर लगने लगा है। सड़कों पर तेज रफ्तार में भागती गाड़ियां कब कहां किसे चपेट में लेकर निकल जाएं इसका कोई भरोसा नहीं रह गया है। बावजूद इसके सड़क पर सुरक्षित यात्रा के लिए कोई कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। यातायात और परिवहन विभाग सिर्फ इसी में अपनी पीठ थपथपा रहा है कि सड़क हादसे से होने वाली मौतों में बीते छह महीने में करीब साढ़े 5 फीसदी की कमी आई है।
हादसों पर नियंत्रण व इसे कम करने के लिए उपाय बताने शासन द्वारा हर जिले में रोड सेफ्टी सेल बनाया जाता है। इसमें प्रशासन व पुलिस के अधिकारी के अलावा पीडब्ल्यूडी, एनएच सहित अन्य विभागों के अधिकारी शामिल होते हैं। सेल में सड़क हादसों को लेकर बैठकें भी होती है और इसमें कारण निकालकर उसे दूर करने के पुख्ता इंतजाम किए जाने का दावा भी किया जाता है। लेकिन सड़क हादसों में थोड़ी सी भी कमी नहीं आ पाई है.
कुछ दिन पहले फरसाबहार थाना क्षेत्र में बस की टक्कर में बाईक पर सवार चार युवकों की घटना स्थल पर ही मौत हो गई थी. जशपुर जिले में बाईक सवारों की दुर्घटना में मौत का सिलसिला अनवरत जारी है.
दरअसल, सड़क हादसों में मौत के लिए लोग भी जिम्मेदार हैं, ज्यादातर लोग अपनी सुरक्षा काे जानबूझकर नजरअंदाज करते हैं . हादसों में होने वाली मौतों में 60 फीसदी से ज्यादा बाइक सवार शामिल होते हैं। इनमें से 80 फीसदी ऐसे बाइक सवार होते हैं जो हेलमेट नहीं पहने होते हैं।बल्कि बाईक पर तीन से चार लोग सवार होकर चलते हैं. पुलिस व यातायात विभाग द्वारा हर साल अभियान चलाकर लोगों से हेलमेट पहनने व नशे में वाहन नहीं चलाने अपील तो की जाती है लेकिन लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं। यदि बाइक सवार हेलमेट पहने तो 30 फीसदी से जाने बच जाती।

हादसे के बाद बेहतर इलाज की सुविधा नहीं

जिले में सड़क हादसे बढ़ रहे लेकिन घायलों के इलाज के लिए सरकारी अस्पतालों में उस तरह की सुविधाएं नहीं बढ़ रही जिससे की जानें बचाई जा सकें। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तो प्राथमिक इलाज के बाद सिर्फ रेफरल सेंटर ही बनकर रह गए हैं। जिला अस्पताल में भी ऐसी सुविधाएं नहीं है जिससे की गंभीर रूप से घायलों की जान बचाई जा सके। न्यूरो सर्जन नहीं होने से यहां सिर में आई चोट के इलाज की सुविधा नहीं है। सड़क हादसे में सिर की चोट वाले ही मरीज पहुंचते हैं। उन्हें भी यहां से रेफर ही किया जाता है।

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