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नो निगेटिव न्यूज़ कहाँ से आया? इसकी खोज में दो साल बरबाद किये।

Truth behind No Negative

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Truth behind No Negative,
मुझे लगा अमेरिका के धनी लोगो ने ये शुरुआत की होगी, लेकिन वहाँ के सबसे ज़्यादा पढ़े जाने वाले अखबार वाशिंगटन पोस्ट की खबरों वाले पेज पर ही लिखा रहता है Democracy Dies in Darkness. बी बी सी सबसे ज़्यादा निगेटिव न्यूज़ प्रसारित करता है। फिर एक पत्रकार मित्र से पूछा जो ब्रूनेई के सुल्तान के चचेरे भाई के अखबार में मोटी तनख्वाह पर् काम करता है। उसने बताया तनख्वाह के हिसाब से उसे काम बहुत ही कम दिया गया है। एकाध डी सी (डबल कॉलम) या टी सी (सिंगल कॉलम) न्यूज़ उसे एडिट करनी होती है। लेकिन यदि कोई निगेटिव न्यूज़ छाप दी जाए तो सुल्तान उसे बहुत गम्भीरता से लेते हैं और खबर लिखने वाले रिपोर्टर को इंसेंटिव भी मिलता है।
सिंगापुर के अखबार भी भाट और चारण परंपरा का निर्वहन करते है लेकिन चोर को चोर कहने में उन्हें गर्व महसूस होता है। वहां सरकार निगेटिव खबरों को  गम्भीरता से लेती है कि उससे गलती कहाँ हुई। वहां ब्रिटेन के कुछ पत्रकार छोटी मोटी पत्रिकाएं निकालते हैं और मालिकों की विश्वव्यापी कम पारिश्रमिक पर शोषण करने की टुच्ची संस्कृति को ज़िंदा रखते हैं। काफी कुछ पढने, कई डॉक्यूमेंट्री देखने और पूछताछ के बाद मालूम हुआ कि पश्चिमी फ़्रांस के सिटी-स्टेट (देश) मोनेको से दस अखवार निकलते हैं और किसी में भी निगेटिव न्यूज़ नहीं निकलती। मोनेको की आबादी मात्र 35000 है और प्रति व्यक्ति न्यूनतम आय साढ़े तीन करोड़ रूपये सालाना है। हर 60 मीटर पर् एक पुलिसवाला हैऔर कुछ इसी तरह कैमरे पूरे देश (शहर) में लगे हैं लिहाजा अपराध न के बराबर होता है।
केवल 1000 पर्यटकों को रोज़ आने की इजाजत वहां के शासक प्रिंस अलबर्ट देते हैं। लोगों का मुख्य काम, अपने कमाए हुए पैसों को उड़ाना मसलन, जुआ खेलने, बढ़िया खाना, शराब पीना और अपनी महंगी महंगी लग्जरी नाव पर लड़कियों के साथ रंगीन ज़िन्दगी गुजारना। मुझे ये भी पता चला कि अगर आपके पास 100 million अमेरिकी डॉलर (720 करोड़ रूपये) तो ही वहाँ जाने और रहने के बारे में सोचें। क्योंकि एकाध कमरे का ठीक ठाक फ़्लैट भी 30-40 करोड़ से कम में नहीं मिलेगा। ऐसी जगह नो निगेटिव अखबार निकलना वाकई तर्क संगत है। जहाँ दुःख या शोक के लिए कोई जगह ही नहीं है। असली अशोकनगर। पर ऐसे शहर में जहाँ दिन की शुरुआत ही माकड़े-भेंनकड़े से होती हो, जहाँ इस तरह के फुलटू आइडिया लाने वाले विद्वानों को किसी रिश्तेदार की शादी में जाने के लिए भी सरकारी वाहन की उम्मीद हो, रहने के लिए घर भी सरकार की दया पर मिले और छीना जाए, वहाँ उनसे नो निगेटिव न्यूज़ की उम्मीद करना बेमानी है। फिर शहर में रोजगार देने वाली संस्थाओं में अखबारों के अलावा अस्पताल, कुछ एन जीओ, हॉटेल और रेडियो कैब भर हैं। बाकी सब रोजगार सरकार ही देती है तो लोग धनी कैसे बनेंगे? अगर सरकारें, भले ही सबसे अच्छे प्रजातंत्र की क्यों न हों, लोगों को धनी बना दें तो वे अगले ही दिन गिर जाएंगी।
जिन राजाओं ने लोगों को धन और आवाज देने की कोशिश की है वे खेत रहे। नामो निशान तक मिट गये। सरकारें चलटी ही शोषण और अपने सुनने की अद्भुत कमजोर शक्ति से। यदि ऐसे में सब कुछ हरा हरा दिखाया जाय या यह कहा जाय कि सब कुछ बढ़िया है, कहीं कुछ निगेटिव नहीं है तो सरकार भी आभासी हो जायेगी। फिर मोनेको में नो निगेटिव न्यूज़ सरकार कैसे चलती है?अव्वल वह छोटा सा देश किसी भी ऐसे गरीब को नहीं आने देता जिसके पास 100 मिलियन डॉलर न हों दूसरा सब कुछ प्रिंस अलबर्ट तय करते हैं जिनके पास तय करने के लिए टूरिज्म पॉलिसी के अलावा शाही मेहमानों के लिए क्या व्यंजन परोसे जाएँ को लेकर एक बैठक ही है। बाकी उनकी जनता जनता है ही नहीं क्योंकि वह रईसी के कारण होश में ही नहीं रहती। इसीलिये अखबार निगेटिव क्या लिखेगा क्योंकि लिखने वाले को भी नहीं मालूम कि इस घनघोर रईसी के बारे में निगेटिव क्या लिखे।
Credit – Mr. Shashikant trivedi ( veteran Journalist)