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अमित शाह की रैली के बाद हिंसा, राजनाथ सिंह ने ममता बनर्जी को किया फोन, सीएम बोलीं -अपने नेता और समर्थकों को संभाल लीजिए

Violence after Amit Shah's rally, Rajnath Singh calls Mamata Banerjee - handle your leaders and supporter

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डेस्क:

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) और केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) के बीच फोन पर कहासुनी की बात सामने आ रही है. सूत्रों के अनुसार पश्चिम बंगाल (Mamata Banerjee)  के कांथी में बीजेपी रेलै के बाद हुई हिंसा को लेकर राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) ने ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) को फोन किया था. राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) ने फोन पर राज्य में लचर होती कानून व्यवस्था और भाजपा की रैली के बाद हुई हिंसा को लेकर चिंता जताई थी. सूत्रों की मानें इसपर मुख्यमंत्री (Mamata Banerjee) ने सिंह को जवाब दिया कि आप पहले अपने नेता और कार्यकर्ताओं को संभाल लीजिए. ध्यान हो कि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की मंगलवार को कांथी में रैली थी. इस रैली के खत्म होने के ठीक बाद बसों पर हमला किया गया, मोटरसाइकिलों को जलाया गया यहां तक कि तृणमूल कांग्रेस के दफ्तर पर भी हमला किया गया.

 

बिगड़ते हालात को देखते हुए घटनास्थल के आसपास बड़ी तादाद में सुरक्षा बलों की तैनाती की गई. इसके बाद तृणमूल कांग्रेस और बीजेपी के नेता एक दूसरे पर आरोप लगाते रहे. जहां तृणमूल कांग्रेस ने कहा कि यह पूरी घटना पहले से ही निर्धारित थी तो वहीं बीजेपी के प्रवक्ता संबित पात्रा ने टीएमसी को तालिबान मामातर करमो से बताया. रैली के बाद फैली हिंसा की सूचना मिलने के बाद ही केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह ने शाम में सीएम को फोन किया था. इसी दौरान दोनों के बीच तीखी बहस की बात कही जा रही है.

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गौरतलब है कि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह बीते कुछ समय से पश्चिम बंगाल सरकार और खासकर ममता बनर्जी पर तीखे हमले कर रहे हैं. कुछ दिन पहले ही उन्होंने कहा था कि ममता दीदी को डर था कि अगर हमारी यात्रा राज्य में निकलती है तो उनकी सरकार की अंतिम यात्रा निकल जाएगी. रैली को संबोधित करते हुए शाह (Amit Shah) ने कहा था कि यह चुनाव पार्टियों के बीच का चुनाव है. यह बंगाल की संस्कृति को समाप्त करने वाली टीएमसी को हराने का चुनाव है. यह बंगाल की जनता को निर्णय लेना है कि संस्कृति को बचाने वाली बीजेपी को लाएंगे या उनकी संस्कृति को खत्म करने वाली टीएमसी को. सुभाष चंद्र को भुलाने में कांग्रेस ने कोई कसर नहीं छोड़ी. लेकिन पीएम मोदी सुभाष बाबू के जीवन, देशभक्ति और उनके बंगाल को अमर करने के लिए अंडमान के टापू का नाम सुभाष जी के नाम पर रखने का फैसला किया है.